ABOUT ME

Monday, November 15, 2010

भ्रष्टाचार का भश्मासुर

मान गये स्पेक्ट्रुम राजा जी,जरा दीवाल पर लिखी इबारत पढ़ ली होती.  खैर, अंत भला तो सब भला. माना कि आपकी  सबसे बड़ी निधी दरअसल करूणानिधि जी है, परन्तु  याद है, आपने शपथग्रहण के समय किसकी सौगंध खायी थी, नही न ?. भारतीय संविधान की. उससे ऊपर कोई नहीं. अपनी लाज खुद बचा ली होती. देखिये, अब आपके करीबी ही
आपके शर्मसार होने के बाद जश्न मना रहे है. पोलिटिक्स में कोई भी परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं  होता.
और अब येदुरप्पा जी कि बारी है. आपकी तरह वो भी सारे  फैसले सही और पुरानी नीतियों के आधार पर ही किया है .क्या बात है!  सारे सही फैसले अपने संतानों और सिश्तेदारों के लिए ही .वाह वाह! यही  न कि ये महज एक संयोग है . आपने क्या खूब कहा कि ये "आदर्श" नहीं है ,माननीय मुख्यमंत्री जी ये "आदर्श" घोटाले से क्या कम है?  शायद नहीं. वैसे भी राष्ट्रीय सम्मान के पुरोधा बीजेपी ( द पार्टी विथ दिफ्फेरेंस)  को बंगारू लक्ष्मण  जी से ज्यादा थोड़े ही आप शर्मिंदा कर पायेंगे .है न? मैं  भी सहमत हूँ आपसे .फिर राजदीप सर देसाई अकसर कहते है कि "हमाम में सब नंगे हैं".क्या फर्क पड़ता है? तो क्या ये नंगापन पब्लिक डोमेन  में चल पायेगा ? नहीं . मान लीजिये, आप अपनी लाज खुद रख लीजिये. आपकी जनता आपको बहुत धन्यवाद् देगी. वर्ना ये भ्रष्टाचार का भश्मासुर आपको भी भष्म करने वाला है क्योंकि  इसका  सरोकार है हमसे, आम आदमी से, आपसे .......धन्यवाद् .

5 comments: